बृहस्पति गोचर 2020 -2021 ( 20 नवम्बर 2020 से 5 अप्रैल 2021 तक ) | daivgya
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बृहस्पति गोचर 2020 -2021 ( 20 नवम्बर 2020 से 5 अप्रैल 2021 तक )

बृहस्पति गोचर 2020 -2021 ( 20 नवम्बर 2020 से 5 अप्रैल 2021 तक )

 

20 नवम्बर 2020 के दोपहर 2:55 पर बृहस्पति का संचार मकर राशि मे हो गया है जो कि बृहस्पति कि नीच राशि है परिणामस्वरूप यह अशुभ फल दायी है परंतु गोचर मे बृहस्पति का शनि के साथ युति बनाना इसके अशुभ फल मे कुछ हद तक कमी व संघर्षों के बाद उच्च सफलता को दर्शता है ।

मेष – बृहस्पति का संचार दशम भाव मे  अपनी नीच राशि मे होने से कारोबार मे किसी पर भरोसा करने के मामले मे अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए , शनि के शुभ प्रभाव के कारण मुश्किलों के बाद सफलता मिलेगी व धन व कार्य के नवीन अवसर प्राप्त होंगे , पिता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें !

वृष – बृहस्पति का संचार नवम भाव मे  अपनी नीच राशि मे होने पर भी आपको भाग्य से पूर्ण सहयोग मिलेगा , धार्मिक अनुष्ठान व वाहन सुख प्राप्त होगा ।

 

मिथुन – बृहस्पति का संचार अष्टम भाव मे  अपनी नीच राशि मे होने से दुर्घटना का भय रहेगा , किसी भी प्रकार के टोने टोटके के प्रयोग से बचें व धार्मिक क्रिया कलाप का उपहास करने से बचे !

 

कर्क – बृहस्पति का संचार सप्तम भाव मे  अपनी नीच राशि मे होने से विवाहेत्तर संबंध व बेमेल प्रेम का योग बनेगा , व्यापारी मे लाभ होगा , फिजूल भाग भाग दौड़ से बचें !

 

सिंह – बृहस्पति का संचार षष्ठम भाव मे  अपनी नीच राशि मे होने से स्वास्थ्य का विशेष ध्यान दें , दांपत्य जीवन मे मधुरता बनाए रखें , चुनौतीपूर्ण समय को धार्मिक क्रिया कलापों मे व्यस्त रहकर निकालें !

 

कन्या – बृहस्पति का संचार पंचम भाव मे  अपनी नीच राशि मे होने से प्रारम्भ मे मानसिक अशांति व मृत व्यक्तियों का सव्प्न दर्शन हो सकता है , पितृ व ईष्टदेव कि पूजा से अरिष्ट निवारण कीजिये परिणाम स्वरूप धन व उन्नति का द्वार खुलेगा !

 

तुला – बृहस्पति का संचार चतुर्थ भाव मे अपनी नीच राशि मे होने से आत्म विश्वास मे कमी व ऋण , रोग व शत्रु से ग्रसित होने के कारण समय तनाव पूर्ण रह सकता है परंतु शनि कि उत्तम अवस्था आपको इस प्रकार के भय से रक्षा करेगा व कार्य क्षेत्र से शुभ समाचार प्राप्त होगा !

 

वृश्चिक – बृहस्पति का संचार तृतीय भाव मे अपनी नीच राशि मे होने से भाई – बहनो से तनाव रह सकता है व धर्म कर्म मे अरुचि उत्पन्न होगी , घर मे सुविधाओ मे वृद्धि होगी , तनाव से बचने के लिए ध्यान योग अवश्य करें !

 

धनु – बृहस्पति का संचार द्वितीय भाव मे  अपनी नीच राशि मे होने से सवास्थ्य का ध्यान रखें व कटु भाषा का प्रयोग करने से बचें , शनि व बृहस्पति कि युति के कारण धन संचय होगा , व समय उत्साहपूर्ण रहेगा !

 

मकर – बृहस्पति का संचार प्रथम भाव मे  अपनी नीच राशि मे होने से व शनि के साथ युति होने से परिवार से अलग एकांत मे अधिक समय व्यतीत होगा , आध्यात्मिक उन्नति होगी , निज प्रयास से धन लाभ होगा परंतु खर्चों कि अधिकता के कारण कुछ परेशानी हो सकती है !

 

कुम्भ – बृहस्पति का संचार द्वादश भाव मे अपनी नीच राशि मे होने से खर्चों कि अधिकता होगी , जन्म स्थान से दूर यात्राओं से लाभ होगा  , स्वास्थ्य का ध्यान रखें व विपरीत परिस्थिति से घबराएँ नहीं !

 

मीन – बृहस्पति का संचार एकादश भाव मे  अपनी नीच राशि मे होने से आय के स्रोत में व्यवधान रह सकता है , परंतु शनि कि योग व्यवधान के बाद श्रेष्ठ धन लाभ व बाहरी संबंधो से शुभ फल प्राप्त कराएगा !  

 

उपाय :- गुरु के अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए धार्मिक ग्रन्थों , पीले वस्त्र व चने की दाल का दान  , वृद्ध ब्राह्मण भोज, व गुरुवार का व्रत रखें !

वैदिक उपाय :- ” ॐ ग्राम ग्रीम ग्रौम सः गुरुवे नमः ” मंत्र का 19000 बार मंत्र जाप , हवन , दान !

शीघ्र लाभ हेतु उपाय :- श्री विष्णु सहस्त्र नाम का 108 दिन पाठ करें !